तुलसी भरोसे राम के निर्भय हो के सोय
अनहोनी होनी नहीं होनी होय सो होय ।
तुलसीदास जी
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हम ख़ुशियों के सौदागर हैं
ग़म नहीं ख़रीदते
हर ऐरि गैरी दुकान का समान
हम नहीं खरीदते।
विजय राज लालावत
आज की तारीख़ का हर साहूकार कल की तारीख़ का चोर है
तुम्हारी चोरी पकड़ी नहीं गई ये बात और है ।
विजयराज लालावत
तुलसी भरोसे राम के निर्भय हो के सोय अनहोनी होनी नहीं होनी होय सो होय । तुलसीदास जी