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Friday, June 18, 2021

Vijay Raj Lalawat: शाम

Vijay Raj Lalawat: शाम: बहुत शाम हुई चलो घर जाएं , दिल ही तो बस टूटा है अब क्या मर जाएं । 💛💚💙💜  

शाम

बहुत शाम हुई चलो घर जाएं ,

दिल ही तो बस टूटा है अब क्या मर जाएं । 💛💚💙💜
 

Monday, November 9, 2020

आख़िर तक

 जो सही रहता है 

आख़िर तक वही रहता है।

               विजय राज लालावत 

Saturday, October 17, 2020

सामान

 हम ख़ुशियों के सौदागर हैं

 ग़म नहीं ख़रीदते 

हर ऐरि गैरी दुकान का समान 

हम नहीं खरीदते।

                   विजय राज लालावत 

Sunday, September 6, 2020

चोरी

 आज की तारीख़ का हर साहूकार कल की तारीख़ का चोर है 

तुम्हारी चोरी पकड़ी नहीं गई ये बात और है ।

            विजयराज लालावत 

Thursday, August 27, 2020

बारिशें

 हक़ीक़तों की बारिशें बरसों बरसी 

हसरतों की जमीं प्यासी की प्यासी 

                       विजयराज लालावत 

Monday, August 24, 2020

दूरियाँ

 यूँ ही नहीं दिलों में दूरियाँ होती हैं

ज़रूर किसी की कुछ मजबूरियाँ होती हैं।

                     विजयराज लालावत 

निर्भय

तुलसी भरोसे राम के निर्भय हो के सोय  अनहोनी होनी नहीं होनी होय सो होय ।                                      तुलसीदास जी