हम ख़ुशियों के सौदागर हैं
ग़म नहीं ख़रीदते
हर ऐरि गैरी दुकान का समान
हम नहीं खरीदते।
विजय राज लालावत
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हम ख़ुशियों के सौदागर हैं
ग़म नहीं ख़रीदते
हर ऐरि गैरी दुकान का समान
हम नहीं खरीदते।
विजय राज लालावत
आज की तारीख़ का हर साहूकार कल की तारीख़ का चोर है
तुम्हारी चोरी पकड़ी नहीं गई ये बात और है ।
विजयराज लालावत
गुमनामियाँ भी अच्छी है सब बदमाशियाँ छुपी रहती है
हर वो शख़्स बदनाम है
जो मशहूर हुआ ।
विजयराज लालावत
कहीं वफ़ाओं की बातें कहीं बारूद के असले थे
वो अख़बार रद्दी के भाव बिका जिसमें करोड़ों के मसले थे
विजयराज लालावत
हम कहाँ अपनी मर्ज़ी से मुँह खोलते हैं
ये तो कमबख़्त तजुर्बे हैं जो वक़्त बेवक्त बोलते हैं।
विजयराज लालावत
तुलसी भरोसे राम के निर्भय हो के सोय अनहोनी होनी नहीं होनी होय सो होय । तुलसीदास जी