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Monday, July 20, 2020

गीत

चलो गीत गाओ चलो गीत गाओ 
गा गा के दुनियाँ को सर पे बैठाओ 
गा ना सके तो हल्ला करेंगे 
मरना पड़ा तो हम मरेंगे 
रोज़ रोज़ मर के यूँ जीना बुरा है 
हर बार ग़म ऐ आंसू पीना बुरा है 
आवाज़ को अपनी संगीत के पैरों पे बैठाओ 
चलो गीत गाओ चलो गीत गाओ 
                                     अज्ञात 

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निर्भय

तुलसी भरोसे राम के निर्भय हो के सोय  अनहोनी होनी नहीं होनी होय सो होय ।                                      तुलसीदास जी