हम हैं मस्त फ़क़ीरा अपना कोई नहीं ठिकाना रे
जैसा अपना आना यारों वैसा अपना जाना रे
राम घाट पे सुबह गुज़ारी प्रेम घाट पे रात कटी
बिना छावनी बिना छपरिया अपनी हर बरसात कटी
लोगों का जो रहा सिराहना अपना रहा पैताना रे
हम हैं मस्त फ़क़ीरा अपना कोई नहीं ठिकाना रे ।
जैसा अपना आना यारों वैसा अपना जाना रे
राम घाट पे सुबह गुज़ारी प्रेम घाट पे रात कटी
बिना छावनी बिना छपरिया अपनी हर बरसात कटी
लोगों का जो रहा सिराहना अपना रहा पैताना रे
हम हैं मस्त फ़क़ीरा अपना कोई नहीं ठिकाना रे ।
(अज्ञात)
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