3732722834590626" async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js" script data-ad-client="ca-pub-3732722834590626" async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js" Vijay Raj Lalawat: फ़क़ीरा

Wednesday, July 8, 2020

फ़क़ीरा

हम हैं मस्त फ़क़ीरा अपना कोई नहीं ठिकाना रे
जैसा अपना आना यारों वैसा अपना जाना रे

राम घाट पे सुबह गुज़ारी प्रेम घाट पे रात कटी
बिना छावनी बिना छपरिया अपनी हर बरसात कटी
लोगों का जो रहा सिराहना अपना रहा पैताना रे

हम हैं मस्त फ़क़ीरा अपना कोई नहीं ठिकाना रे ।

                                         (अज्ञात)

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निर्भय

तुलसी भरोसे राम के निर्भय हो के सोय  अनहोनी होनी नहीं होनी होय सो होय ।                                      तुलसीदास जी