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Saturday, June 19, 2021

निर्भय

तुलसी भरोसे राम के निर्भय हो के सोय 

अनहोनी होनी नहीं होनी होय सो होय । 

                                    तुलसीदास जी  

Friday, June 18, 2021

Vijay Raj Lalawat: शाम

Vijay Raj Lalawat: शाम: बहुत शाम हुई चलो घर जाएं , दिल ही तो बस टूटा है अब क्या मर जाएं । 💛💚💙💜  

शाम

बहुत शाम हुई चलो घर जाएं ,

दिल ही तो बस टूटा है अब क्या मर जाएं । 💛💚💙💜
 

Monday, November 9, 2020

आख़िर तक

 जो सही रहता है 

आख़िर तक वही रहता है।

               विजय राज लालावत 

Saturday, October 17, 2020

सामान

 हम ख़ुशियों के सौदागर हैं

 ग़म नहीं ख़रीदते 

हर ऐरि गैरी दुकान का समान 

हम नहीं खरीदते।

                   विजय राज लालावत 

Sunday, September 6, 2020

चोरी

 आज की तारीख़ का हर साहूकार कल की तारीख़ का चोर है 

तुम्हारी चोरी पकड़ी नहीं गई ये बात और है ।

            विजयराज लालावत 

Thursday, August 27, 2020

बारिशें

 हक़ीक़तों की बारिशें बरसों बरसी 

हसरतों की जमीं प्यासी की प्यासी 

                       विजयराज लालावत 

Monday, August 24, 2020

दूरियाँ

 यूँ ही नहीं दिलों में दूरियाँ होती हैं

ज़रूर किसी की कुछ मजबूरियाँ होती हैं।

                     विजयराज लालावत 

Friday, August 21, 2020

गुमनामियाँ

गुमनामियाँ भी अच्छी है सब बदमाशियाँ छुपी रहती है 

हर वो शख़्स बदनाम है 

जो मशहूर हुआ ।

              विजयराज लालावत

Monday, August 17, 2020

अख़बार

कहीं वफ़ाओं की बातें कहीं बारूद के असले थे 

वो अख़बार रद्दी के भाव बिका जिसमें करोड़ों के मसले थे 

                विजयराज लालावत                   

Friday, August 14, 2020

तजुर्बे

 हम कहाँ अपनी मर्ज़ी से मुँह खोलते हैं

ये तो कमबख़्त तजुर्बे हैं जो वक़्त बेवक्त बोलते हैं।

             विजयराज लालावत

Saturday, August 8, 2020

सियासत

 यही होती है अहदे सियासत की चाल 

बंद आँखों में रख देते हैं रोशन ख़याल 

                          अज्ञात 

ग़मगीनी

 लगता है बहुत ग़मगीनी में दिन बिताते हो,

ये जो बात बात पे मुस्कुराते हो । 

                विजयराज लालावत 

Wednesday, August 5, 2020

इश्क़

इस इश्क़ की दुनिया के क़ायल सभी हैं
कोई बता देता है कोई छिपा लेता है 
पर घायल सभी है ।
                              अज्ञात 

Saturday, August 1, 2020

बदनामिया

खुदा बचाये इन महबूब कि गलियों से
बदनामियां भी मिलती है मशहूर होने के बाद
                                विजयराज लालावत 

Friday, July 24, 2020

अधिकार

जो हर जवाबदारी से मुकरते हैं
दावे बड़े अधिकार से करते हैं।
                   विजयराज लालावत 


Monday, July 20, 2020

गीत

चलो गीत गाओ चलो गीत गाओ 
गा गा के दुनियाँ को सर पे बैठाओ 
गा ना सके तो हल्ला करेंगे 
मरना पड़ा तो हम मरेंगे 
रोज़ रोज़ मर के यूँ जीना बुरा है 
हर बार ग़म ऐ आंसू पीना बुरा है 
आवाज़ को अपनी संगीत के पैरों पे बैठाओ 
चलो गीत गाओ चलो गीत गाओ 
                                     अज्ञात 

Sunday, July 19, 2020

मर्ज़

रोग बदन का हो तो कोई  दवा करे
ज़हन में ग़र मर्ज़ हो तो कोई क्या करे 
                  विजयराज लालावत

Saturday, July 18, 2020

घर

बहुत शाम हुई चलो घर जाएँ
दिल ही तो बस टूटा है अब क्या मर जाएँ ।
                             विजयराज लालावत 

Thursday, July 16, 2020

तमाशबीन

ये जो मेरे हमनशीन है 
पता चला है सब तमाशबीन है ।
                                   विजयराज लालावत 

निर्भय

तुलसी भरोसे राम के निर्भय हो के सोय  अनहोनी होनी नहीं होनी होय सो होय ।                                      तुलसीदास जी